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पुलिस टीम द्वारा डिजिटल स्कैम की एक प्रकरण का भांडा फोड़ करते हुए पीड़िता के 32 लाख 31 हजार 798 रुपए की धनराशि को किया बरामद

पुलिस टीम द्वारा डिजिटल स्कैम की एक प्रकरण का भांडाफोड करते हुए पीड़िता के 32 लाख 31 हजार 798 रुपए की धनराशि को किया बरामद…. स्कैमर्स ने पीड़िता को रखा था 24 घंटे से अधिक डिजिटल अरेस्ट पर ।

जानकारी के अनुसार पीड़िता जी.एम.एस रोड देहरादून की निवासी है जिनको 30.01.2024 को उनके मोबाइल पर अनजान नंबर से फोन आया जिसमें स्कैमर्स ने स्वयं को DHL कुरियर कंपनी से बताकर बोला कि शिकायतकर्ता के नाम के पार्सल को मुंबई सीमा शुल्क ने पासपोर्ट क्रेडिट कार्ड और MDMA जैसी अवैध वस्तुओं के कारण जप्त कर लिया है तथा उक्त कॉल को कथित मुंबई क्राइम ब्रांच अंधेरी से बात करने के लिए कर दिया गया इसके बाद कॉल को मुंबई क्राइम ब्रांच अंधेरी से जोड़ा गया जिसने व्हाट्सएप कॉल कर पार्सल के बारे में पूछताछ की और खुद को वरिष्ठ सीबीआई अधिकारी बनकर 24 घंटे के अंदर गिरफ्तारी की धमकी देकर वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट एवं भारत के सर्वोच्च न्यायालय का एक नोटिस दिखाया। डिजिटल अरेस्ट होने के कारण स्कैमर्स ने शिकायतकर्ता के दिन भर की गतिविधियों की जानकारी ली और उन्हें कहीं भी न जाने या यात्रा करने के लिए भी मना कर दिया।

शिकायतकर्ता जेल जाने के डर से ये बात किसी से नहीं और उनके जाल में फंसकर बैंक के खातों में जमा पैसे 32,317,98 रुपए स्कैमर्स ने अपने एक्साउंट में ट्रांसफर कर दिए , और बोला कि अवैध लेनदेन को ट्रैक करने के लिए निकरानी में रखे जा रहे हैं और 48 घंटों में ये पैसे उनके खाते में वापस कर दिए जायेगे । जब शिकायतकर्ता को दिल्ली के सुप्रीम कोर्ट के नाम पर 2 दिनों में 10,50,000 रुपए ओर मांगने के लिए कॉल आया तब शिकायतकर्ता को एहसास हुआ कि ये इस घोटाले का शिकार हो गए हैं। तब शिकायतकर्ता ने पुलिस को सूचना दी।

पुलिस को जब इस घोटाले की जानकारी हुई तब पुलिस उपाधीक्षक अंकुश मिश्रा रौतेला के नेतृत्व में ये स्कैमर्स की खोज जारी करी गई। खोज के दौरान पता चला कि आरोपी के ऊपर तेलंगाना और कर्नाटक राज्य में भी शिकायत दर्ज की गई है।

जिसके बाद तकनीकी संसाधनों के प्रयोग से मुख्य अभियुक्त दीपक कुमार, 39 वर्ष को आजादनगर सूदना, डाल्टगंज शहर, जिला पलामू , झारखंड से गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से 2 मोबाइल फोन , संबंधित चेकबुक , आधारकार्ड आदि बरामद हुए।

बता दें ये अपराधी लोगों को व्हाट्सएप कॉल या फोन कॉल करके डराता है, अपने आप को नारकोटिक्स डिपार्टमेंट, क्राइम ब्रांच , CBI ऑफिसर, IT या ED ऑफिसर के नाम से कॉल कर झूठी साइबर अपराधियों की खबर या फर्जी दस्तावेज पासपोर्ट आदि अवैध सामग्री पाये जाना बताकर मनी लांड्रिंग नारकोटिक्स आदि के केस में गिरफ्तार करने का भय दिखाकर लोगों को डिजिटल हाउस अरेस्ट कर उनका सारा पैसा आरबीआई से जांच वेरिफिकेशन कराने हेतु बताए गए खातों में ट्रांसफर करवा कर धोखाधड़ी को अंजाम देते हैं।

इस वारदात के बाद वरिष्ठ पुलिस अध्यक्ष एसटीएफ उत्तराखंड श्री नवनीत सिंह द्वारा जनता से अपील की है कि डिजिटल अरेस्ट एक स्कैम है जो वर्तमान में पूरे भारतवर्ष में चल रहा है कोई भी सीबीआई अफसर मोबाइल क्राइम ब्रांच साइबर क्राइम आईटीआई , इड ऑफिसर या कोई भी एजेंसी आपको व्हाट्सएप के माध्यम से डिजिटल अरेस्ट करने हेतु नोटिस प्रेषित नहीं करती है साथ ही कोई व्यक्ति आपको फर्जी दस्तावेज अवैध सामग्री आदि के नाम पर डरा धमका रहा है या पैसों की मांग कर रहा है तो इस संबंध में एसटीएफ या साइबर क्राइम थाने में जल्द से जल्द ही अपनी शिकायत दर्ज कारण आप इस तरह की किसी भी घटना की शिकायत 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर या http://ww.cybercrime.gov.in पर भी दर्ज करा सकते हैं।