उत्तराखंड : उत्तराखंड में पहले से ही छोटे चार धाम स्थापित है: गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम। लेकिन हाल ही में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री ने एक दौरे के दौरान हानोल में स्थित एक मंदिर को पांचवे धाम बनाने की बात कही थी।
हनोल में स्थित महासू देवता मंदिर को उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में अत्यंत श्रद्धा और आस्था के साथ पूजा जाता है। यह मंदिर लगभग 9वीं शताब्दी का माना जाता है और महासू देवता को न्याय का देवता कहा जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, महासू देवता किसी भी प्रकार के अन्याय को सहन नहीं करते और अपने भक्तों को हमेशा न्याय प्रदान करते हैं।

हनोल मंदिर का इतिहास
लकड़ी और पत्थर से बने इस मंदिर की बनावट पारंपरिक काठ-कूनी शैली में की गई है, जो उत्तराखंड और हिमाचल की प्राचीन स्थापत्य कला को दर्शाती है।कहा जाता है कि एक समय यहां एक राक्षस का आतंक था, जिसे मिटाने के लिए भगवान शिव और माता शक्ति ने अपने चार पुत्रों: बौठा महासू, बाशिक महासू, पाबासिक महासू और चालदा महासू को भेजा था।इन चारों भाइयों ने राक्षस का वध किया था और तभी से इन्हें महासू देवता के रूप में पूजा जाता है।
‘पंचम धाम’ बनेगा महासू देवता का मंदिर
उत्तराखंड में पहले से ही चार धाम — बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री — स्थित हैं। मुख्यमंत्री धामी ने हनोल मंदिर को ‘पंचम धाम’ का दर्जा देने की बात 23 फरवरी 2025 में कही थी, जिससे इससे धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक संरक्षण दोनों के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। उन्होंने मंदिर परिसर के लिए एक मास्टर प्लान तैयार करने और दुबारा से कार्य को भव्यता के साथ करने के निर्देश दिए थे।
सीएम धामी का बयान
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा: हनोल का यह क्षेत्र न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां की सकारात्मक ऊर्जा और सांस्कृतिक समृद्धि इसे पंचम धाम के रूप में स्थापित करने योग्य बनाती है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार इस क्षेत्र में होमस्टे योजना, पर्यटन सुविधाओं और बुनियादी ढांचे के विकास को प्राथमिकता देगी ताकि स्थानीय लोगों को रोज़गार के नए अवसर मिलें।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में जनपद उत्तरकाशी के मोरी ब्लॉक स्थित हनोल के महासू देवता मंदिर के दौरे के दौरान इसे ‘पंचम धाम’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह स्थान ना केवल ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यहां की संस्कृति और परंपरा भी उत्तराखंड की विरासत का अहम हिस्सा है।
स्थानीय जनता और पुजारियों ने मुख्यमंत्री की योजना का किया स्वागत
मंदिर के पुजारियों और स्थानीय निवासियों ने मुख्यमंत्री की इस घोषणा का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह क्षेत्र सदियों से धार्मिक महत्व का केंद्र रहा है लेकिन कभी राष्ट्रीय स्तर पर वह पहचान नहीं मिली जिसकी वह हकदार है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की इस पहल से हनोल मंदिर को देशभर में एक नई पहचान मिल सकती है। ‘पंचम धाम’ के रूप में मान्यता मिलने से यह न केवल आध्यात्मिक तीर्थ के रूप में उभरेगा, बल्कि उत्तराखंड की लोकसंस्कृति, परंपरा और ग्रामीण पर्यटन को भी नया जीवन मिलेगा।