देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी अधिनियम) वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक मजबूत आधार साबित होगा। उन्होंने कहा कि जब गांव का विकास होगा, तभी देश तरक्की करेगा।
मंगलवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में मुख्यमंत्री ने बताया कि इस नए अधिनियम में ग्रामीण विकास के साथ-साथ आपदा प्रभावित क्षेत्रों में किए जाने वाले कार्यों को भी शामिल किया गया है। पर्वतीय और आपदा संवेदनशील राज्य उत्तराखंड के लिए यह अधिनियम विशेष रूप से लाभकारी होगा।
हिमालयी राज्यों को 90:10 के अनुपात में वित्तीय सहायता
मुख्यमंत्री ने बताया कि सामान्य राज्यों को केंद्र सरकार से 60:40 के अनुपात में वित्तीय सहयोग मिलेगा, जबकि हिमालयी राज्यों के लिए विशेष छूट दी गई है। उत्तराखंड सहित हिमालयी राज्यों में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत और राज्य सरकार 10 प्रतिशत वित्तीय सहायता देगी, जिससे राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।
मनरेगा का नाम बदलना नहीं, संरचना को मजबूत करना उद्देश्य
सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम का उद्देश्य केवल मनरेगा का नाम बदलना नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार की पूरी संरचना को मजबूत करना है। नए अधिनियम में रोजगार के दिनों को 100 से बढ़ाकर 125 कर दिया गया है, जो पहले से 25 प्रतिशत अधिक है।
उन्होंने बताया कि यदि 15 दिन के भीतर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया गया, तो बेरोजगारी भत्ता देना अनिवार्य होगा। भुगतान एक सप्ताह के भीतर किया जाएगा और देरी होने पर मुआवजे का भी प्रावधान रखा गया है।
आपदा प्रबंधन, जल संरक्षण और ग्रामीण अवसंरचना पर जोर
अधिनियम के तहत जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन, ग्रामीण अवसंरचना, सड़क, नाली, तालाब, चेकडैम, स्कूल, अस्पताल, ड्रेनेज, रिटेनिंग वॉल, स्किल सेंटर और स्वयं सहायता समूहों के लिए शेड जैसे कार्य किए जाएंगे। एसबीआई की विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार इस अधिनियम से राज्यों को करीब 17 हजार करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ होगा।
तकनीक आधारित पारदर्शिता और सामाजिक ऑडिट
योजना में बायोमेट्रिक हाजिरी, जियो-टैगिंग, जीएसआई मैपिंग, मोबाइल एप, सार्वजनिक डैशबोर्ड, एआई आधारित फ्रॉड डिटेक्शन और साल में दो बार अनिवार्य सोशल ऑडिट का प्रावधान किया गया है।
किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए फसल की बुवाई और कटाई के मौसम में अधिकतम 60 दिन तक योजना के कार्य कानूनी रूप से रोके जा सकेंगे, ताकि खेतों में मजदूरों की कमी न हो।
ग्राम पंचायत तय करेंगी विकास कार्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजना के तहत कार्य ऊपर से नहीं थोपे जाएंगे। ग्राम पंचायतें स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास कार्य तय करेंगी और कम से कम 50 प्रतिशत कार्य सीधे ग्राम पंचायत स्तर पर कराए जाएंगे। जॉब कार्ड, पंजीकरण और योजना निर्माण ग्राम सभा के माध्यम से होगा।
इस अवसर पर राज्यसभा सांसद एवं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, विधायक दलीप रावत और भाजपा महासचिव कुंदन परिहार भी उपस्थित रहे।