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चारधाम के कपाट बंद होने की तिथियाँ घोषित, इस दिन से नहीं हो सकेगा देवदर्शन

देहरादून: उत्तराखंड के पवित्र चार धामों में इस साल के दर्शन का आख़िरी चरण शुरू हो चुका है। जैसे-जैसे सर्दी बढ़ रही है, वैसे ही चारों धामों — यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ — के कपाट बंद करने की तिथियाँ तय कर दी गई हैं।

चारधाम यात्रा हर साल अप्रैल-मई में कपाट खुलने के साथ आरंभ होती है और सर्दियों के आगमन पर कपाट बंद कर दिए जाते हैं। इस परंपरा को सदियों से निभाया जा रहा है ताकि देव प्रतिमाओं की पूजा सर्द मौसम में उनके शीतकालीन स्थलों पर की जा सके।

कब-कब बंद होंगे कपाट

गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर 2025 को अभिजीत मुहूर्त में सुबह 11:36 बजे बंद किए जाएंगे।यमुनोत्री धाम और केदारनाथ धाम के कपाट 23 अक्टूबर 2025 को विधि-विधान के साथ बंद होंगे।बद्रीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर 2025 को दोपहर 2:56 बजे बंद किए जाएंगे।इन सभी तिथियों की घोषणा पुजारियों और तीर्थ पुरोहितों की उपस्थिति में पारंपरिक पंचांग और गणनाओं के आधार पर की गई है।

क्यों बंद किए जाते हैं कपाट

चारधाम यात्रा मार्ग समुद्र तल से ऊँचाई पर स्थित हैं। अक्टूबर के अंत से यहाँ बर्फबारी शुरू हो जाती है और तापमान शून्य से नीचे चला जाता है। ऐसे में यातायात ठप पड़ जाता है और यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिरों के कपाट सर्दियों में बंद कर दिए जाते हैं।

कपाट बंद होने के बाद देवप्रतिमाओं को शीतकालीन गद्दी स्थलों पर ले जाया जाता है ,जैसे गंगोत्री माता को मुखवा गांव में,यमुनोत्री देवी को खरसाली में,भगवान केदारनाथ की पूजा ऊखीमठ में,और भगवान बद्रीनाथ की पूजा जोशीमठ के नृसिंह मंदिर में की जाती है।

श्रद्धालुओं के लिए सुझाव

राज्य पर्यटन विभाग ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा से पहले मौसम की जानकारी लें और केवल अधिकृत ट्रैवल एजेंसियों या पंजीकृत गाइडों के साथ ही यात्रा करें। इसके साथ ही, मंदिर प्रशासन ने चेतावनी दी है कि कपाट बंदी के बाद किसी भी प्रकार का दर्शन या प्रवेश वर्जित रहेगा।

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