गुवाहाटी। असम और पूरे संगीतप्रेमी देश के लिए एक दुखद दिन रहा जब लोकप्रिया गायक जुबिन गर्ग का देहांत समाचारों में आया। राज्य सरकार ने तत्काल प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें राजकीय सम्मान देने और कुछ दिनों का शोक रखने का फैसला किया। शाम के पहले ही लोग, संगीतकार और राजनेता सोशल मीडिया व सार्वजनिक मंचों पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने लगे।

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने मीडिया से बात में कहा कि जुबिन गर्ग असम के लिए सिर्फ एक कलाकार नहीं थे, वे हमारी संस्कृति और पहचान थे। मुख्यमंत्री ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की और राज्य की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिया। राज्य सरकार ने उनके सम्मान में तीन दिन का शोक रखने और राजकीय शौर्य के साथ अंतिम संस्कार करने की व्यवस्था की घोषणा की है।
घटनास्थल पर फैली शोक की लहर के बीच शहर के कई हिस्सों में लोग पुष्प अर्पित करने और मोमबत्ती जलाने के लिए इकट्ठा हुए। कला-संस्कृति के कई प्रतिनिधियों ने कहा कि जुबिन ने असमिया संगीत को राष्ट्रीय मंच पर पहचान दी और उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। कई युवा गायकों ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर जुबिन के साथ हुई पुरानी परफॉर्मेंस की क्लिप साझा कर उन्हें याद किया।
परिवार ने जनता से शोक व्यक्त करने का आग्रह करते हुए कहा है कि वे मौन भाव से जुबिन को याद रखें।
सामाजिक और सांस्कृतिक सुझावों के साथ-साथ कुछ विद्वानों ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि जुबिन गर्ग के नाम पर एक संगीत छात्रवृत्ति या पुरस्कार स्थापित किया जाना चाहिए, ताकि उनकी कला का प्रभाव लंबे समय तक नए कलाकारों तक पहुँचे। राज्य प्रशासन ने इस पहल पर विचार करने का संकेत दिया है।
जुबिन गर्ग की आवाज़ और उनके गाए गीतों ने आंचलिक संगीत को मसविदों से बाहर निकालकर जन-जन तक पहुँचाया — यही वजह है कि उनका जाना सिर्फ असम ही नहीं, पूरे संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। जनता, साथी कलाकार और प्रशासन अब उनके योगदान को सम्मानित करने व एक यादगार पहल के ज़रिये उनकी स्मृति को जीवित रखने की दिशा में आगे आ रहे हैं।