आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा से शुरू हुई एक मामूली गुमशुदगी की जांच ने देशभर में फैले एक संगठित धर्मांतरण नेटवर्क का पर्दाफाश कर दिया है। पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) द्वारा चलाए गए ‘मिशन अस्मिता’ के तहत अब तक 6 राज्यों से 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। जांच में सामने आया है कि ये गिरोह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और फेसबुक का इस्तेमाल कर युवतियों को प्रेमजाल में फंसाता था और फिर मानसिक रूप से प्रभावित कर मजहब परिवर्तन के लिए मजबूर करता था।

इस नेटवर्क की शुरुआत उस वक्त उजागर हुई जब आगरा के सदर बाजार इलाके की दो सगी बहनें अचानक लापता हो गईं। पुलिस जांच में पता चला कि इन लड़कियों का व्यवहार पिछले कुछ समय से काफी बदल गया था—वे हिंदू रीति-रिवाजों से दूरी बना रही थीं और पूजा-पाठ का विरोध करने लगी थीं। STF और साइबर सेल की संयुक्त जांच में यह बात सामने आई कि ये दोनों बहनें एक कट्टरपंथी ऑनलाइन ग्रुप के संपर्क में थीं, जो उन्हें लगातार इस्लाम के कट्टर विचारों की ओर मोड़ रहा था। लड़कियों को झूठे वादों, कुरान की तोड़ी-मरोड़ी गई व्याख्याओं, और विदेशी मौलवियों के वीडियो के जरिए प्रभावित किया गया।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में दिल्ली से फैजान खान, गोवा से आदिल शेख, पश्चिम बंगाल से रईस सिद्दीकी, उत्तराखंड से नसीर अहमद और राजस्थान से यूसुफ अली शामिल हैं। इन सभी के पास अलग-अलग जिम्मेदारियां थीं—कोई सोशल मीडिया पर ब्रेनवॉशिंग कंटेंट भेजता, कोई फर्जी दस्तावेज़ बनवाता, तो कोई फंडिंग का इंतजाम करता। एसटीएफ के मुताबिक, इस नेटवर्क के तौर-तरीके प्रतिबंधित आतंकी संगठन ISIS के ऑनलाइन भर्ती मॉड्यूल से मेल खाते हैं। गिरोह छोटे-छोटे सेल्स में बंटा था और एक-दूसरे से लिंक में नहीं रहता था, जिससे ट्रैक करना मुश्किल हो जाए।
अब तक 35 से ज्यादा लड़कियों को इस नेटवर्क के जरिए टारगेट किए जाने की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से 15 को एसटीएफ ने समय रहते रेस्क्यू कर लिया है। इनमें कई लड़कियों ने अपना नाम तक बदल लिया था—जैसे एक लड़की ने खुद को ‘SB कृष्णा’ से बदलकर ‘आयशा’ कहलवाना शुरू कर दिया था। कई पीड़िताओं ने बयान में बताया कि उन्हें यह विश्वास दिलाया गया कि हिंदू धर्म गलत है और इस्लाम कबूल करने से ही मोक्ष मिलेगा।
पुलिस का कहना है कि इस नेटवर्क को विदेशी फंडिंग मिल रही थी और इसके तार PFI, SDPI जैसे प्रतिबंधित संगठनों से भी जुड़े हो सकते हैं। इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों की जांच भी जारी है। STF ने 45 से ज्यादा टीमों के साथ देशभर में छापेमारी की है और आगे और गिरफ्तारियों की उम्मीद जताई जा रही है।