देहरादून: केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में जारी स्वच्छता सर्वेक्षण 2024–25 में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून एक बार फिर सफाई व्यवस्था को लेकर कटघरे में आ गई है। इस बार देहरादून को पुरानी कचरा निस्तारण साइटों के चलते शून्य अंक मिले हैं, जिससे शहर टॉप 50 साफ शहरों की सूची से बाहर हो गया है।
नगर निगम की ओर से सफाई व्यवस्था सुधारने के तमाम दावों के बावजूद, सहस्रधारा रोड स्थित ट्रेंचिंग ग्राउंड और शीशमबाड़ा वेस्ट प्लांट में पड़े लाखों टन पुराने कचरे को हटाया नहीं जा सका। यही कारण रहा कि निरीक्षण के दौरान सर्वे टीम ने इन स्थलों को अस्वच्छ और अनुपयोगी मानते हुए देहरादून को ‘जीरो नंबर’ दिए।
पिछले साल की तुलना में मामूली सुधार, लेकिन औसत प्रदर्शन
पिछले सर्वे में देहरादून को राष्ट्रीय स्तर पर 68वां स्थान मिला था, जबकि इस बार यह 62वें पायदान पर पहुंचा है। हालांकि, यह अंकों में सुधार लाने से कुछ भी हुआ है क्योंकि अन्य मापदंडों—जैसे डोर-टू-डोर कलेक्शन, वेस्ट प्रोसेसिंग, और जन जागरूकता—में गिरावट देहरादून पीछे रह गया।
नगर निगम ने गिनाई मजबूरियां, वादा किया सुधार का
नगर आयुक्त नमामी बंसल ने बताया कि फिलहाल निगम ‘स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण नीति’ लागू करने की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत लोगों को यूजर चार्ज में छूट दी जाएगी। वहीं महापौर सौरभ थपलियाल ने दोष ठेकेदारों पर मढ़ते हुए कहा कि कई एजेंसियों की लापरवाही और अनुशासनहीनता के चलते हालात बिगड़े हैं और संबंधित कंपनियों पर कार्रवाई की जाएगी।
देहरादून के पर्यावरण कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों ने भी शहर की सफाई व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि केवल स्कोर सुधारने से कुछ नहीं होगा, जब तक स्थायी समाधान, शहरी प्लानिंग, और संपूर्ण निस्तारण मॉडल लागू नहीं किए जाते।