देहरादून: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के सैफई गांव में बन रहे ‘केदारेश्वर मंदिर’ को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मंदिर की बनावट उत्तराखंड स्थित प्रसिद्ध केदारनाथ मंदिर से हूबहू मिलती है, जिस पर अब उत्तराखंड चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने कड़ी आपत्ति दर्ज की है।

महापंचायत ने इसे आस्था और संस्कृति का अपमान बताया है और साफ शब्दों में कहा है कि अगर मंदिर की संरचना, नाम और शिवलिंग की प्रतिकृति को बदला नहीं गया, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि केदारनाथ धाम न केवल एक ऐतिहासिक स्थल है बल्कि हिंदू श्रद्धालुओं की आत्मा का केंद्र है, जिसकी नकल करना निंदनीय है।
महापंचायत के उपाध्यक्ष पंडित विनोद शुक्ला ने कहा, “केदारनाथ धाम के शिवलिंग को स्वयंभू माना गया है, जिसकी पुनरावृत्ति कहीं और नहीं हो सकती। यह धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला काम है।”

उन्होंने स्पष्ट किया कि मंदिर में केदारनाथ नाम और संरचना का उपयोग कर जनता को भ्रमित किया जा रहा है। उनका यह भी दावा है कि केदारनाथ जैसी प्रतिकृति दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र में भी बनाई जा रही थी, जिसे विरोध के बाद बंद कर दिया गया था। उन्होंने सैफई में बन रहे इस मंदिर को भी वैसा ही प्रयास करार दिया।
यह मंदिर सैफई के एक सपा विधायक के सहयोग से बनवाया जा रहा है और इसे ‘केदारेश्वर मंदिर’ नाम दिया गया है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि उनका मकसद श्रद्धालुओं को एक धार्मिक स्थल देना है, न कि किसी मूल तीर्थ की नकल करना।

उत्तराखंड महापंचायत ने राज्य सरकार से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। पंचायत के अनुसार, 2024 में राज्य मंत्रिमंडल ने चारधामों के नाम के दुरुपयोग पर रोक का प्रस्ताव पारित किया था, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पंचायत ने अंतिम चेतावनी देते हुए कहा कि यदि मंदिर की संरचना और नाम में बदलाव नहीं किया गया तो वे न्यायालय का रुख करेंगे और देशव्यापी आंदोलन भी छेड़ा जा सकता है।