टिहरी में भिलंगना झील से बढ़ा खतरा, वैज्ञानिकों ने जताई केदारनाथ जैसी त्रासदी की आशंका

देहरादून। उत्तराखंड में एक बार फिर बड़ी आपदा का खतरा सामने आ गया है। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिकों ने टिहरी जिले के घनसाली क्षेत्र में दूधगंगा ग्लेशियर के पिघलने से बन रही भिलंगना झील को बेहद खतरनाक बताया है। 1980 के आसपास बनी यह झील अब 1.204 किलोमीटर लंबी और करीब 528 मीटर चौड़ी हो चुकी है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसमें करीब 10 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी जमा है, जो किसी भी समय निचले इलाकों में बड़ी तबाही ला सकता है।

 

 

एनडीएमए ने झील को ‘अत्यंत खतरनाक’ श्रेणी में रखा

भिलंगना झील 4750 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट ऑथोरिटी ने इसे सर्वाधिक खतरनाक झीलों की श्रेणी में शामिल किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि झील के टूटने या क्षतिग्रस्त होने पर नीचे के गांवों और कस्बों में भारी जन–धन हानि हो सकती है।

 

ग्लेशियर 0.7 मीटर प्रतिवर्ष की रफ्तार से पिघल रहा

वाडिया इंस्टीट्यूट और देश के चार अन्य बड़े संस्थानों ने 1968 से 2025 तक के आंकड़ों का अध्ययन किया है। रिपोर्ट के अनुसार, दूधगंगा ग्लेशियर हर साल करीब 0.7 मीटर की रफ्तार से पिघल रहा है। ग्लेशियर के तेज पिघलने से झील का फैलाव भी लगातार बढ़ रहा है। वरिष्ठ वैज्ञानिक अमित कुमार के अनुसार, झील का आउटब्रस्ट होने पर पानी लगभग 30 मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से नीचे की ओर बह सकता है।

 

20 साल में 47% बढ़ीं झीलें, खतरा और गहराया

भिलंगना नदी बेसिन में करीब 36 ग्लेशियर मौजूद हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 78 वर्ग किलोमीटर है। इसके अलावा यहां 11 अन्य ग्लेशियर–जनित झीलें भी पाई गई हैं। वर्ष 2000 से 2020 के बीच इस क्षेत्र में झीलों की संख्या में 47% की बढ़ोतरी हुई है, जो ग्लोबल वॉर्मिंग और जलवायु परिवर्तन का साफ संकेत है।

 

तबाही की आशंका, तुरंत निगरानी और कार्रवाई की जरूरत

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि झील का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और आसपास की ढलानों का कटाव भी तेज हो रहा है। यदि किसी कारण से झील में आउटब्रस्ट होता है, तो भिलंगना घाटी समेत कई निचले क्षेत्र गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने राज्य सरकार और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को तुरंत निगरानी बढ़ाने, अलर्ट सिस्टम स्थापित करने और सुरक्षा उपाय करने की सलाह दी है ताकि संभावित आपदा को रोका जा सके।

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