सुहागन महिलाओं के सबसे पसंदीदा त्योहारों में से एक करवा चौथ की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, पति-पत्नी के अटूट प्रेम का प्रतीक ये पर्व,जिसका हर साल सुहागिनों को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस दिन वो अपने पति की लंबी उम्र के लिए निर्जला व्रत रखती हैं और चांद निकलने के बाद उसकी पूजा करके ही व्रत खोलती हे लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि करवा चौथ के दिन चांद की ही पूजा क्यों की जाती है और चांद निकलने के बाद ही महिलाएं व्रत क्यों खोलती हैं?
आइए आज हम जानते हैं इसके पीछे की पूरी कहानी और क्या मान्यता हे और इस बार चाँद निकलने का समय क्या हे
यह त्योहार हिंदू पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है, करवाचौथ पर सुहागिनें अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। ये व्रत शिव-पार्वती के आशीर्वाद का भी प्रतीक है,
क्यों पूजा जाता हैं चंद्रमा को
चंद्रमा को सुहाग का प्रतीक भी माना जाता है। आयुर्वेद और ज्योतिष में चंद्रमा मन, शांति और दीर्घायु का कारक है। इसलिए चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।
इस वर्ष शुभ मूहर्त और समय
वही इस साल करवा चौथ का व्रत शुक्रवार, यानी 10 अक्टूबर को रखा जाएगा। व्रत चतुर्थी तिथि यानि 9 अक्टूबर की रात्रि 10:54 मिनट पर शुरू होकर 10 अक्टूबर की शाम 7:38 मिनट तक रहेगी। वही पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:57 मिनट से 7:11 मिनट तक रहेगा और वही अगर बात करे चंद्र उदय की तो चाँद निकलने का समय रात्रि 8:13 मिनट पर उदय होगा और खास बात ये है कि इस दिन कृतिका नक्षत्र का योग होने से यह व्रत अखंड सौभाग्य देने वाला माना जा रहा है।
सुहागिन महिला इस दिन ये करे
वही इस पवन पर्व पर सुहागिन अपने पति की लंबी आयु की कामना और अपने दांपत्य जीवन को सुखद करने की प्रार्थना करें. रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति का आशीर्वाद लें और उनके हाथ से जल पीकर व्रत का पारण करें. फिर, परिवार के सभी सदस्यों को भोजन कराकर स्वयं प्रसाद ग्रहण करें.